14 फरवरी 2026 : दक्षिणी विधानसभा हलके में दर्ज साइबर एक्ट के मामले में उस समय बड़ा मोड़ आ गया, जब लुधियाना की अदालत ने बीजेपी के दो काउंसलरों के पतियो हैप्पी शेरपुरिया और कुलवंत कांति को जमानत दे दी। यह जमानत माननीय अदालत द्वारा एडवोकेट डॉ. गौरव अरोड़ा की ओर से पेश की गई मजबूत दलीलों के बाद मंजूर की गई।
पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि बीजेपी काउंसलरों के पतियों ने हलका दक्षिणी के विधायक राजिंदर पाल छिना और आम आदमी पार्टी के खिलाफ एक रैली के दौरान कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं, जिससे विधायक और पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा। इसी आधार पर पुलिस ने ऑनलाइन धमकी, उत्पीड़न (हैरासमेंट) और साइबर कानून से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपियों का मामले से सीधा संबंध साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी सबूत मौजूद नहीं है। यह भी दलील दी गई कि मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज किया गया है, जो संविधान द्वारा प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है और आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने दोनों को जमानत दे दी।
इस फैसले को राजनीतिक तौर पर भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि मामला दक्षिणी हलके की सियासत से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था और विपक्ष द्वारा इसे बड़ा मुद्दा बनाया जा रहा था। अदालत के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के स्थानीय विधायक को राजनीतिक झटका लगने की चर्चा है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए हैप्पी शेरपुरिया और कुलवंत कांति ने कहा कि यह न्याय की जीत है और अदालत ने कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत दी है। उन्होंने कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग देंगे और सच्चाई सामने आएगी।
