पुणे 13 फरवरी 2026 : मध्य रेलवे के पुणे विभाग ने भारत की स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को लागू करना शुरू कर दिया है। पुणे विभाग के 700 किलोमीटर रेल मार्ग में से 250 किलोमीटर पर नॉन-सिग्नलिंग कवच परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। जल्द ही और मार्गों पर भी परीक्षण करके कवच प्रणाली को शुरू किया जाएगा, जिससे रेल यात्रा और अधिक सुरक्षित होगी।
अपघटन घटाने का उद्देश्य:
रेलवे बोर्ड ने ‘कवच’ प्रणाली मुख्य रूप से रेल हादसों की संख्या शून्य करने और रेल यात्रा की सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की है। यह स्वदेशी तकनीक आमने-सामने की टक्कर, लाल सिग्नल पार करना, और गति सीमा उल्लंघन रोकने के साथ-साथ मानवीय त्रुटियों को कम करने के लिए काम करती है।
कदम-कदम पर लागू:
यह प्रणाली धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क में लागू की जा रही है। पुणे रेलवे क्षेत्र में कुल 700 किलोमीटर का मार्ग है, जिसमें पहले चरण में पुणे-कोल्हापुर और दौंड-मनमाड़ मार्गों पर परीक्षण पूरा किया गया। चरण-2 के तहत पढेगांव, बेलापूर और राहुरी में प्रणाली स्थापित हो चुकी है और दौंड-येवला क्षेत्र में काम तेजी से चल रहा है। दूरसंचार के लिए नियोजित 123 टावरों में से 53 कवच टावर स्थापित किए जा चुके हैं।
नोवंबर में शुरू हुआ काम:
रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार, लोकोमोटिव में कवच प्रणाली स्थापित करने का काम पिछले नवंबर में पुणे डीजल और इलेक्ट्रिक लोको शेड में शुरू किया गया और 18 दिनों में पूरा कर लिया गया। इस दौरान वॅप-7 प्रकार की चार लोकोमोटिव में कवच प्रणाली सफलतापूर्वक स्थापित कर जांच के बाद सेवा में भेज दी गई।
टीम का नामांकन:
कर्नेक्स संस्थान के समन्वय में संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए यह कार्य शेड में पहली बार पूरा किया गया। कार्यक्षमता, गति और गुणवत्ता के लिए काम करने वाली टीम को पुरस्कार हेतु नामांकित किया गया और इस उपक्रम को पुणे विभाग की ‘उत्कृष्ट कार्य’ सूची में दर्ज किया गया।
