12 फरवरी 2026 : नवनिर्वाचित उपमहापौर राजेंद्र जंजाळ ने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि पालकमंत्री संजय शिरसाट ने उनकी उम्मीदवारी का विरोध इसलिए किया क्योंकि वे अपनी बेटी हर्षदा शिरसाट को उपमहापौर बनाना चाहते थे। छत्रपति संभाजीनगर में संजय शिरसाट और शिवसेना जिलाध्यक्ष राजेंद्र जंजाळ के बीच लंबे समय से चल रहा राजनीतिक टकराव उपमहापौर चुनाव के दौरान खुलकर सामने आ गया।
भाजपा ने शिवसेना को उपमहापौर पद देकर नगर निगम की सत्ता में शामिल करने का फैसला किया था और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने जंजाळ को उम्मीदवार बनाया। हालांकि संजय शिरसाट इस फैसले के खिलाफ थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व के निर्णय के आगे उनकी नहीं चली।
चुनाव जीतने के बाद जंजाळ समर्थकों ने जोरदार जश्न मनाया और शिरसाट पर तंज कसने वाले पोस्टर भी लगाए। इस पर जंजाळ ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी उनसे उम्र का हवाला देकर किनारे किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उपमहापौर पद के लिए सभी योग्यताएं होने के बावजूद उन्हें सिर्फ इसलिए रोका गया क्योंकि पालकमंत्री अपनी बेटी को यह पद दिलाना चाहते थे।
उधर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नाशिक में पार्टी नेताओं को गुटबाजी से बचने की चेतावनी दी और कहा कि शिवसेना विकास की राजनीति करती है। उन्होंने संकेत दिए कि उपमहापौर पद सवा साल और गटनेता पद एक साल के फॉर्मूले पर दिया जा सकता है, हालांकि अंतिम फैसला वही करेंगे।
