चंडीगढ़ 11 फरवरी 2026 : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पैंशन को लेकर विपक्ष भ्रामक प्रचार कर रहा है जबकि लाभार्थी का पैसा सीधा उस गरीब आदमी के खाते में जाए इस गारंटी के साथ डबल इंजन सरकार काम कर रही है। मुख्यमंत्री मंगलवार को हरियाणा निवास में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस ने तो झूठ की दुकान खोली हुई है और लगातार इसके नेता भ्रामक प्रचार करने में लगे है। कांग्रेसी नेता लगातार बयान दे रहे हैं कि प्रदेश में 2 लाख लोगों की पैंशन काट दी गई है।
सच यह है कि बुजुर्गों का सम्मान करना तो हमारी सरकार की प्राथमिकता है। इस दौरान सहकारिता मंत्री डा. अरविंद शर्मा, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बुजुर्गों के हितों की हमेशा बात की है और हमने भी अपने संकल्प पत्र में भी कहा था कि 70 साल से ऊपर के बुजुर्गों को अगर किसी प्रकार की दिक्कत आती है या फिर उनका स्वास्थ्य खराब होता है, तो उनके इलाज की चिंता उनके परिवार को नहीं करनी बल्कि इलाज की चिंता मोदी सरकार और हरियाणा सरकार करेगी। इसी के तहत 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों को 5 लाख रुपए तक का दबाव दिया जा रहा है।
पंजाब में केवल 1500 रुपए पैंशन
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि वहां पर पैंशन केवल मात्र 1500 रुपए दी जा रही है। पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब की जनता को वहां की सरकार ने सब्जबाग दिखाए है कि पैंशन 2500 रुपए कर देंगे, लेकिन किया कुछ नहीं। जबकि बी.जे.पी. सरकार ने जो कहा वो किया, और आज देश में सबसे ज्यादा बुजुर्ग सम्मान राशि हरियाणा में दी जा रही है।
विपक्षी उंगली कटवा कर शहीद होना चाहते हैं
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कांग्रेस की बात हो या इनैलो की। जब इनकी सरकार थी, तब इन्होंने कुछ नहीं किया। पैशन में केवल नाम मात्र बढ़ोतरी की गई। पैशन को लेकर तो इनका हाल ऐसा है कि उंगली कटवाकर खुद को शहीद साबित करने की कोशिश कर रहे है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बी. जे.पी. सरकार ने कभी इनकम स्लैब नहीं लगाई, लेकिन इस पर भी आमजन को गुमराह किया जा रहा है।
इनैलो के 5 साल के शासनकाल में वृद्धावस्था पेंशन में केवल 200 रुपए की बढ़ोतरी हुई। इसी प्रकार, कांग्रेस के 10 वर्ष के शासनकाल में केवल 700 रुपए की बढ़ोतरी हुई। जबकि वर्तमान बी. जे. पी. सरकार ने पिछले 11 वर्षों में वृद्धावस्था पैशन 1000 रुपए से बढ़ाकर 3200 रुपए मासिक की है। इस प्रकार, सरकार ने वृद्धावस्था पैंशन में सबसे ज्यादा 2200 रुपए की बढ़ोतरी की है। वर्तमान में 20 लाख 31 हजार 367 बुजुर्गों को वृद्धावस्था पैंशन का लाभ मिल रहा है।
हमारी सरकार ने नहीं लगाई आय सीमा
सैनी ने कहा कि वृद्धावस्था पैशन पर आय सीमा प्रदेश की बी. जे. पी. सरकार ने नहीं लगाई। प्रदेश में वृद्धावस्था पैशन पर पहली बार 10 हजार रुपए वार्षिक आय सीमा 13 अगस्त, 1992 को लगाई गई थी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, उस समय वृद्धावस्था पेंशन भी 100 रुपए मासिक थी। उस समय 6 लाख 50 हजार बुजुर्गों को वृद्धावस्था पैशन का लाभ मिलता था। इसके बाद पहली नवंबर, 1999 को इनैलो ने अपने कार्यकाल में वृद्धावस्था पैशन 100 रुपए से बढ़ाकर 200 रुपए मासिक की। उन्होंने भी 10 हजार रुपए वार्षिक आय सीमा रखी। उन्होंने कहा कि इनैलो सरकार ने पहली नवंबर, 2004 को वृद्धावस्था पैशन 200 रुपए से बढ़ाकर 300 मासिक कर दी। परंतु, फिर भी वार्षिक आय सीमा का बंधन न तो हटाया और न बढ़ाया।
मार्च, 2004 में 9 लाख 3 हजार बुजुर्गों को वृद्धावस्था पैशन का लाभ मिलता था। इसके बाद, मार्च 2005 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी और भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री बने। चार वर्ष बाद उन्होंने पहली मार्च, 2009 को वृद्धावस्था पैशन 300 रुपए से बढ़ाकर 500 रुपए मासिक कर दी। परंतु, उन्होंने भी वार्षिक आय सीमा 10 हजार रुपए ही रखी, यानी उसमे कोई बदलाव नहीं किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि चाहे कांग्रेस सरकार हो और इनैलो की सरकार हो या हुड्डा साहब की पहली सरकार रही हो, सभी की यही सोच थी कि कम से कम लोगों को योजना का लाभ मिले। इसलिए, वर्ष 1992 में निर्धारित वार्षिक आय सीमा को वर्ष 2009 तक 10 हजार रुपए वार्षिक ही रखा गया। वर्ष 2014 के चुनाव को देखते हुए हुड्डा ने इलैक्शन से पहले वृद्धावस्था पैशन को बढ़ाकर 1,000 रुपए मासिक तथा मार्च, 2012 में वार्षिक आय सीमा को 2 लाख रुपए कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बी.जे.पी. सरकार ने 5 अप्रैल, 2023 को वृद्धावस्था पैशन के लिए वार्षिक आय सीमा 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 3 लाख रुपए की, जो आज भी जारी है।
पेंशन काटी नहीं, रोकी है
मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि प्रदेश के 2 लाख लोगों की पैशन काट दी गई, ऐसा भ्रम फैलाने में विपक्ष जुटा है जबकि सच्चाई यह है कि जब किसी पेशन लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो नियमानुसार उसकी पैशन स्वतः बंद कर दी जाती है। 2 लाख मामलों में से लगभग 1 लाख 3 हजार (आधे से भी अधिक) ऐसे लाभार्थी हैं, जिनकी मृत्यु के उपरांत पेंशन बंद की गई है। उन्होंने बताया कि अक्तूबर, 2024 से रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया पोर्टल में किसी तकनीकी समस्या के कारण प्रदेश सरकार को हरियाणा में मृत हुए व्यक्तियों काडाटा नहीं मिला था। यह डाटा नवम्बर, 2025 में प्राप्त होने के बाद एकमुश्त में ऐसे मृतकों की पेंशन कटी है। लगभग 37 हजार ऐसे मामले सामने आए थे, जिनमें वास्तविक आयु 60 वर्ष से कम थी। लोगों ने डाटाबेस में छेड़छाड़ करके पैशन स्वीकृत करवा ली थी। इन लाभार्थियों की पेंशन स्थगित कर दी गई है। यदि ये लोग अपनी आयु 60 वर्ष से अधिक होने का कोई प्रमाण देंगे, तो इनकी पेंशन पुनः शुरू कर दी जाएगी।
