चंद्रपुर 11 फरवरी 2026 : जहां बीजेपी के वरिष्ठ नेता व विधायक सुधीर मुनगंटीवार और विधायक किशोर जोरगेवार शिवसेना (उद्धव गुट) से चुपचाप बातचीत कर रहे थे, वहीं कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने में कांग्रेस उलझी रही। आपसी कलह के चलते कांग्रेस के 27 नगरसेवक अंत तक एकजुट नहीं हो पाए, जिसका फायदा उठाकर बीजेपी ने ‘साइलेंट’ चाल चलते हुए चंद्रपुर नगर निगम की सत्ता अपने नाम कर ली।
कांग्रेस में गुटबाजी बनी वजह
चंद्रपुर नगर निगम चुनाव में कांग्रेस 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। सत्ता गठन की प्रक्रिया के दौरान वडेट्टीवार और धानोरकर के बीच महापौर पद को लेकर टकराव बढ़ गया। दोनों अपने-अपने गुट को उम्मीदवार बनवाने पर अड़े रहे। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की मध्यस्थता के बावजूद विवाद नहीं सुलझा और मामला दिल्ली तक पहुंचा।
दो दिनों की बातचीत के बाद तय हुआ कि महापौर पद धानोरकर गुट को और उपमहापौर पद वडेट्टीवार गुट को मिलेगा, लेकिन महापौर पद के लिए चार दावेदार होने के कारण अंतिम नाम पर चुनाव से एक दिन पहले तक सहमति नहीं बन सकी।
कांग्रेस-शिवसेना बैठकें रहीं बेनतीजा
शिवसेना (उद्धव गुट) भी महापौर पद की मांग कर रही थी। मंगलवार सुबह वडेट्टीवार और शिवसेना जिलाध्यक्ष संदीप गिऱ्हे की बैठक हुई, लेकिन कांग्रेस के इनकार के बाद बैठक बेनतीजा रही। नाराज होकर शिवसेना ने बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान कर दिया, क्योंकि बीजेपी ने उन्हें महापौर पद देने का आश्वासन दिया था।
इधर बीजेपी नेता मुनगंटीवार और जोरगेवार पहले से ही समर्थन जुटाने में लगे थे। मुनगंटीवार ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि बीजेपी का ही महापौर बनेगा।
वंचित बहुजन आघाड़ी की कार्रवाई
नगर निगम में वंचित बहुजन आघाड़ी के नगरसेवक मतदान से अनुपस्थित रहे, जिसके बाद पार्टी की चंद्रपुर इकाई को भंग कर दिया गया।
संख्याबल के लिहाज से कांग्रेस के पास 27, शेतकरी कामगार पार्टी के 3 और बसपा के समर्थन से कुल 31 का आंकड़ा बन रहा था, लेकिन AIMIM के तटस्थ रहने और मित्र दलों की अनदेखी के कारण कांग्रेस को नुकसान हुआ। AIMIM ने कहा कि कांग्रेस ने कभी उनसे समर्थन नहीं मांगा, इसलिए वे तटस्थ रहे।
अंततः कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी और समन्वय की कमी का फायदा उठाकर बीजेपी ने सत्ता हासिल कर ली।
