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UP: 17 लाख राशन कार्ड रद्द होने का खतरा, सपा सांसद जावेद अली ने जताई चिंता

30 जनवरी 2026 : समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद जावेद अली खान ने राज्यसभा में सरकार से खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSA) के तहत मुफ्त राशन पाने वालों के लिए आय सीमा बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान आय मानदंड पुराने हैं और इसके कारण उत्तर प्रदेश में लगभग 17 लाख लोगों के राशन कार्ड रद्द होने का खतरा है। गुरुवार को शून्यकाल के दौरान उठाए गए इस मुद्दे में जावेद अली ने कहा कि यह अधिनियम विशेषकर कोविड संकट के दौरान गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित हुआ है।

पुरानी आय सीमा अब अनुपयुक्त
सांसद ने बताया कि FSA 2013 में लागू हुआ था, जब ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले लोगों को गरीब माना जाता था और शहरों में 3 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों को लाभार्थी बनाया जाता था। जावेद अली ने कहा, “अधिनियम पास हुए 13 साल हो गए हैं, लेकिन एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया आज तक नहीं बदला गया। इस दौरान महंगाई बढ़ी है, आयकर स्लैब बदले हैं, मनरेगा की मजदूरी बढ़ी है और सांसदों का वेतन भी बढ़ा है। लेकिन FSA में कोई बदलाव नहीं हुआ।”

आर्थिक गणना: पुराने 2 लाख रुपये की वर्तमान कीमत
सांसद ने कहा कि उन्होंने एक अर्थशास्त्री से पूछकर देखा कि 2013 में 2 लाख रुपये की आय आज के हिसाब से कितनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख रुपये आज के हिसाब से 3.60 लाख रुपये के बराबर होंगे। शहरी क्षेत्रों में 3 लाख रुपये आज के हिसाब से 5.40 लाख रुपये के बराबर होंगे। उनका कहना है कि यही आय मानदंड अब FSA के लिए लागू किया जाना चाहिए।

17 लाख राशनकार्ड रद्द होने का खतरा
जावेद अली ने सरकार से अपील की कि एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया बढ़ाया जाए, वरना अकेले उत्तर प्रदेश में 17 लाख राशन कार्ड रद्द हो सकते हैं, जो गरीबों के साथ अन्याय होगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) का महत्व
– NFSA 5 जुलाई 2013 को लागू हुआ।
– यह देश की 1.4 अरब आबादी के लगभग दो-तिहाई लोगों को रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराता है।
– प्राथमिकता प्राप्त परिवार (PHH) के लिए हर व्यक्ति को हर महीने 5 किलो अनाज दिया जाता है।
– अंत्योदय अन्न योजना (AAY) के तहत हर परिवार को 35 किलो अनाज मिलता है।
– जावेद अली का कहना है कि आय मानदंड में संशोधन गरीबों के हित में जरूरी है, ताकि खाद्यान्न का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।

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