पालघर 30 जनवरी 2026 : भारत का पहला समुद्री विमानतल मुंबई के पास, पालघर जिले में बन रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई और पालघर के यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी। इस विमानतल का निर्माण पालघर के किनारे समुद्र में बन रहे कृत्रिम द्वीप पर किया जाएगा, जिसके लिए लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है।
इसमें से लगभग 25 हजार करोड़ रुपये सिर्फ समुद्र की जमीन पुनः प्राप्त करने में खर्च होंगे, जबकि बाकी धन का उपयोग टर्मिनल भवन, रनवे, एयरसाइड और लैंडसाइड सुविधाओं के निर्माण में होगा। यह एयरपोर्ट पूरी तरह से कृत्रिम द्वीप पर बना होगा और इसे हर साल 90 मिलियन यात्रियों को संभालने की क्षमता के अनुसार डिज़ाइन किया जाएगा, जिससे यह देश के सबसे बड़े एयरपोर्टों में से एक बन जाएगा। महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (MADC) द्वारा पिछले साल शुरू किया गया पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन अब अंतिम चरण में है।
विमानतल की संरचना:
विमानतल पर दो समानांतर रनवे होंगे। यह एयरपोर्ट सालाना 3 मिलियन मेट्रिक टन कार्गो संभालने की क्षमता वाला एक प्रमुख हवाई मालवाहन केंद्र भी बनेगा। विशेष रूप से, यह पूरी तरह से हर मौसम के अनुकूल होगा और ग्रीनफील्ड खोल-पानी वाले बंदरगाह से सीधे जुड़ा होगा।
कनेक्टिविटी:
विमानतल की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए कई प्रमुख लिंक प्रस्तावित हैं:
- वडोदरा–मुंबई एक्सप्रेसवे से सीधी कनेक्टिविटी
- पश्चिम रेलवे से मेट्रो लिंक
- मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी
- नियोजित उत्तन–विरार सी लिंक से जोड़ना, जो दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के आठ स्तरीय उत्तर–दक्षिण कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा
इन कनेक्शनों के साथ, बढ़वण में समुद्र के ऊपर बने इस विमानतल का मुंबई महानगर क्षेत्र के परिवहन नेटवर्क में निर्णायक योगदान होगा।
