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Ajit Pawar: नेताओं के निधन से पुणे में सत्ता का खालीपन

पुणे 29 जनवरी 2026 : पिछले दो वर्षों में तीन दशकों तक पुणे का संचालन करने वाले सभी प्रमुख नेता अब इस दुनिया में नहीं हैं, जिससे अब यह सवाल राजनीतिक गलियारों में उठ रहा है कि पुणे का अगला कारभारी कौन होगा।

1992 के नगरपालिका चुनाव तक पुणे में विठ्ठलराव गाडगीळ और जयंतराव टिळक के अलग-अलग गुट थे। कांग्रेस पार्टी से होने के बावजूद पुणे और महापालिका का संचालन एक हाथ में नहीं था। उसी चुनाव में सुरेश कलमाडी के समर्थकों ने महापालिका में जीत हासिल की। इसके बाद गाडगीळ और टिळक गुट के कई वरिष्ठ नगरसेवकों ने भी कलमाडी के नेतृत्व को स्वीकार किया। राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के कारण कलमाडी की स्थिति मजबूत हुई। उनके कारभारीपन का दौर लगभग दस साल तक निर्विवाद रहा, उसके बाद पांच साल उन्होंने अजित पवार के साथ साझेदारी में काम किया। 2014 में कांग्रेस द्वारा कलमाडी को निलंबित करने के बाद उनका राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो गया और हाल ही में उनका निधन हो गया।

अजित पवार ने 1997 में प्रा. रामकृष्ण मोरे के नेतृत्व को चुनौती दी और पिंपरी-चिंचवड़ महापालिका का नियंत्रण हासिल कर कारभारीपद पाया। 2002 के बाद पुणे राजनीति में उन्होंने सक्रिय ध्यान दिया, हालांकि उन्हें कभी-कभी द्वितीयक भूमिका निभानी पड़ी। लेकिन 2007 में कलमाडी की कांग्रेस को अलग करने के लिए अजित पवार ने भाजपा और शिवसेना का साथ लेकर ‘पुणे पैटर्न’ लागू किया। इस चाल के बाद उनका पुणे पर नियंत्रण सात वर्षों तक रहा।

2014 के विधानसभा चुनाव के बाद गिरीश बापट राज्य मंत्री बने और पुणे के पालकमंत्री भी बने। महापालिका में राष्ट्रवादी कांग्रेस की सत्ता होने के बावजूद बापट का कहना अंतिम निर्णय बन गया और पुणे का कारभारीपद उनके पास आ गया। 2017 के महापालिका चुनाव में बापट के नेतृत्व में भाजपा के 97 नगरसेवक चुने गए, जिससे उनके कारभारीपद पर स्थायित्व आया। बापट 2019 में सांसद बने, लेकिन उन्होंने हमेशा महापालिका और शहर की राजनीति पर नजर रखी। 2023 में उनकी मृत्यु से पुणे का कारभारीपद रिक्त हो गया।

अजित पवार 2019 में पुणे के पालकमंत्री बने और उन्होंने फिर से कारभारीपद की कमान संभाली। हालांकि महापालिका पर उनकी पूर्ण नियंत्रण नहीं थी, लेकिन उपमुख्यमंत्रिपद होने के कारण उनका प्रभाव भारी था। उद्धव ठाकरे सरकार गिरने के बाद वे एक साल तक इस पद से दूर रहे, लेकिन फडणवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री बनकर उन्होंने पुणे में सक्रियता दिखाई। हाल ही में हुए चुनाव में अजित पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ महापालिका पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन नागरिकों ने उन्हें समर्थन नहीं दिया। इससे स्पष्ट हो गया कि पुणे में नया कारभारी आने वाला है। इस प्रक्रिया के दौरान अजित पवार का निधन हो गया, और अब इस खाली पद पर कौन आएगा, इसकी चर्चा तेज है।

कारभारीपद के संभावित दावेदार:
केंद्र में राज्यमंत्री मुरलीधर मोहोळ और राज्य में मंत्री चंद्रकांत पाटील को पुणे का संभावित कारभारी माना जा रहा है, लेकिन उन्हें अपना कारभारीपन साबित करना होगा। पिंपरी-चिंचवड़ में महेश लांडगे और शंकर जगताप के बीच भी इसी पद को लेकर मुकाबला है। अजित पवार के निधन से दुखी पुणेकरों में यह चर्चा है कि भविष्य में वास्तव में कौन कारभारी बनेगा, इसका उत्तर समय ही देगा।

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