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चाइनीज़ डोर का कहर: 2 साल के मासूम से छिना मां का साया

लुधियाना (26 जनवरी 2026)

पंजाब में प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक रही “मौत की डोर” (चाइनीज़ डोर) ने आज फिर एक घर में अंधेरा कर दिया। लोग अभी समराला के 15 वर्षीय युवक तरनजोत सिंह की चाइनीज़ डोर से हुई मौत के सदमे से उबरे भी नहीं थे कि अब मुल्लांपुर दाखा में एक महिला की जान जाने से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

खुशियों के अरमान मातम में बदले

मृतका की पहचान सरबजीत कौर (जसलीन कौर) के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, सरबजीत कौर अपने परिवार में होने वाली शादी की तैयारियों के लिए बड़े उत्साह के साथ खरीदारी करने जा रही थी। उसे क्या पता था कि जिस घर में शादी के गीत गूंजने वाले थे, वहां कुछ ही पलों में मातम छा जाएगा।

कैसे हुआ रोंगटे खड़े कर देने वाला हादसा?

रायकोट रोड पर गुरुद्वारा साहिब के पास जब सरबजीत कौर अपनी स्कूटी पर जा रही थी, तभी हवा में लटकती एक चाइनीज़ डोर उसके गले में फंस गई। डोर इतनी तेजधार थी कि पलक झपकते ही उसने सरबजीत का गला बुरी तरह काट दिया। गंभीर हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया।

मासूम युवराज मां की ममता से वंचित

इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि सरबजीत कौर अपने पीछे 2 साल का मासूम बेटा युवराज छोड़ गई है। वह बच्चा, जिसे अभी यह भी नहीं पता कि “मौत” क्या होती है, अब पूरी ज़िंदगी अपनी मां की गोद और ममता के लिए तरसेगा। आज मुल्लांपुर का हर निवासी प्रशासन से पूछ रहा है—
“आख़िर कब तक चाइनीज़ डोर ऐसे ही मासूमों की जान लेती रहेगी?”

प्रशासनिक नाकामी पर उठे कड़े सवाल

लोगों में सरकार और प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सिर्फ कागज़ी प्रतिबंधों से काम नहीं चलेगा। चाइनीज़ डोर बेचने वालों के खिलाफ सीधे हत्या का मामला (धारा 302) दर्ज होना चाहिए। साथ ही उन माता-पिता को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए जो अपने बच्चों को यह खतरनाक डोर दिलाते हैं।

चाइनीज़ डोर से पतंग उड़ाना कोई शौक नहीं, बल्कि एक अपराध है। आज किसी और का घर उजड़ा है, कल इसकी चपेट में कोई भी आ सकता है। आइए, इंसानियत के नाते इस “मौत की डोर” का पूरी तरह बहिष्कार करें, ताकि किसी और मासूम के सिर से मां का साया न उठे।

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