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‘सड़कें जान ले रही हैं, पुल जिंदगी छीन रहे हैं…’ नोएडा के युवराज मेहता की मौत पर राहुल गांधी का गुस्सा

 21 जनवरी 2026 : कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ग्रेटर नोएडा में एक दर्दनाक हादसे पर गहरी नाराजगी जताई है। यह हादसा एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से जुड़ा है, जो पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में कार गिरने के कारण डूब गए। राहुल गांधी ने इस घटना को लेकर सरकार और प्रशासन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश के शहरी इलाकों में हालात खराब होने की सबसे बड़ी वजह जवाबदेही का पूरी तरह खत्म हो जाना है।

क्या बोले राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा—

“सड़कें जान ले रही हैं,
पुल जान ले रहे हैं,
आग जान ले रही है,
प्रदूषण जान ले रहा है,
भ्रष्टाचार मार रहा है,
उदासीनता मार रही है।

भारत में शहरी व्यवस्था के पतन का कारण धन, तकनीक या समाधान की कमी नहीं है, बल्कि जवाबदेही की कमी है।”

उन्होंने कटाक्ष करते हुए साफ शब्दों में कहा कि “कोई जवाबदेही नहीं है।”

राहुल गांधी ने यह भी कहा कि भारत की समस्या सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि समाज में गहराई तक फैल चुकी लालच की वह आदत है, जिसने शासन की जवाबदेही को निगल लिया है।

युवराज को बचाने की कोशिश करने वाले चश्मदीद का वीडियो भी शेयर

राहुल गांधी ने अपने पोस्ट के साथ उस चश्मदीद का वीडियो भी शेयर किया, जिसने युवराज को बचाने की कोशिश की थी। वीडियो में वह व्यक्ति यह कहते हुए नजर आता है कि सरकारी विभागों और प्रशासन की लापरवाही की वजह से ही युवक की जान गई।

कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?

यह हादसा शुक्रवार रात ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में हुआ। जानकारी के मुताबिक सड़क पर 20 फुट से ज्यादा गहरा पानी से भरा गड्ढा था। अंधेरी रात और घने कोहरे की वजह से युवराज को गड्ढा नजर नहीं आया उसकी कार दीवार तोड़ते हुए सीधे गहरे गड्ढे में जा गिरी।

दो घंटे तक मदद की गुहार, लेकिन नहीं पहुंचा प्रशासन

बताया जा रहा है कि युवराज मेहता दो घंटे से ज्यादा समय तक जिंदगी और मौत से लड़ता रहा। वह लगातार लोगों से मदद की गुहार लगाता रहा लेकिन इस दौरान प्रशासन की तरफ से कोई ठोस मदद नहीं पहुंची। आखिरकार गड्ढे में भरे पानी की वजह से युवराज की मौत हो गई।

प्रशासन और सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद सड़क निर्माण की गुणवत्ता, गड्ढों की सुरक्षा, चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग और आपात स्थिति में प्रशासन की सक्रियता, इन सभी मुद्दों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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