19 जनवरी 2026 : देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार की सुबह भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। ‘नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी’ के अनुसार, सुबह लगभग 8 बजकर 44 मिनट पर आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.8 रही। इसका केंद्र उत्तरी दिल्ली के इलाके में जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे पाया गया। राहत की बात यह है कि तीव्रता कम होने की वजह से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
इससे पहले गुजरात के कच्छ जिले में भी शुक्रवार और शनिवार की बीच वाली रात को जमीन हिली थी। वहां आए भूकंप की तीव्रता दिल्ली के मुकाबले काफी ज्यादा यानी 4.1 मापी गई थी। रात के करीब 1 बजकर 22 मिनट पर आए इस झटके से लोग काफी डर गए थे और अपने घरों से बाहर निकल आए थे। इस भूकंप का केंद्र खावड़ा से 55 किलोमीटर दूर उत्तर दिशा में था। कच्छ का इलाका वैसे भी भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि साल 2001 के विनाशकारी भूकंप की यादें आज भी लोगों के मन में ताजा हैं।
जमीन के अंदर होने वाली इस हलचल के पीछे का वैज्ञानिक कारण हमारी धरती की बनावट में छिपा है। दरअसल, धरती के अंदर 7 बड़ी टेक्टोनिक प्लेटें मौजूद हैं जो हमेशा धीमी गति से घूमती रहती हैं। जब ये प्लेटें घूमते हुए आपस में टकराती हैं या एक-दूसरे से रगड़ खाती हैं, तो वहां भारी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है। यही ऊर्जा जब बाहर निकलने की कोशिश करती है, तो हमें ऊपर जमीन पर कंपन महसूस होता है, जिसे हम भूकंप कहते हैं।
