मुंबई 18 जनवरी 2026 : डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय विमानतळ के विस्तार को लेकर कई सालों से देरी बनी हुई है। भूमिपूजन हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन केंद्र सरकार से अभी तक मंजूरी नहीं मिली है। इस विलंब के कारण विस्तार का ठेका मिलने वाली जीएमआर कंपनी फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विमानतल के अद्यतन और विस्तार परियोजना का आभासी भूमिपूजन किया था। इसके एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद विमानतल का हस्तांतरण जीएमआर को नहीं किया गया है। नागपुर विमानतल के विस्तार और अद्यतन का मामला शुरू से ही विवादों में रहा है। एमआईएल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निविदा आमंत्रित की थी, जिसमें 13 कंपनियों ने भाग लिया। तकनीकी जाँच के बाद चार कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया गया।
विमानतल के वैश्विक स्तर पर विकास के लिए टर्मिनल्स, विमान पार्किंग और यात्रियों की सुविधा को लेकर राज्य सरकार के साथ महसूल के हिस्से पर लंबी बातचीत हुई। जीएमआर ने 5.76% से बढ़ाकर 14.49% महसूल देने का प्रस्ताव स्वीकार किया और इसी आधार पर कंपनी को चयनित किया गया। 12 मार्च 2019 को लेटर ऑफ अवार्ड दिया गया और कन्सेशन एग्रीमेंट का मसौदा तैयार हुआ।
सरकार की सलाह पर 19 मार्च 2020 को एमआईएल ने निविदा प्रक्रिया रद्द कर दी, जिसके बाद जीएमआर ने न्यायालय में जीत हासिल की। अंततः प्रधानमंत्री मोदी ने भूमिपूजन किया। उस समय तीन महीने के भीतर हस्तांतरण की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन अब तक कोई निर्णय नहीं हुआ है। प्रस्ताव केंद्र सरकार के पास लंबित है और मंजूरी मिलने के बाद ही जीएमआर काम शुरू कर पाएगी।
वर्तमान स्थिति में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल केवल नाम में अंतरराष्ट्रीय है। फिलहाल यहां केवल शारजाह और दोहा के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित हैं। कोरोना से पहले यहां प्रतिदिन 40 घरेलू उड़ानें थीं, लेकिन इस लक्ष्य को हासिल करने में विमानतल प्रशासन असफल रहा है। इसके अलावा, विमानतल परिसर में खुले कुत्तों की समस्या यात्रियों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है।
