पुणे 12 जनवरी 2026 : महापालिका चुनाव में पहली बार उतरे ग्रामीण इलाकों के उम्मीदवारों ने इस बार मुकाबले को प्रतिष्ठा की लड़ाई बना दिया है। इन ग्रामस्थ उम्मीदवारों को शहर के बड़े और प्रभावशाली प्रत्याशियों का भी समर्थन मिल रहा है। चुनाव से पहले सर्वे में नाम चमकाने के लिए जहां जमकर पैसा बहाया गया, वहीं चुनावी मैदान के लिए 15 से 20 करोड़ रुपये तक का इंतजाम कर लिया गया है।
एक-एक प्रभाग में प्रमुख दलों के चार-चार उम्मीदवार मैदान में हैं। अगर मुख्य मुकाबले में शामिल आठ उम्मीदवार औसतन 15 करोड़ रुपये खर्च करते हैं, तो कुल खर्च का आंकड़ा 120 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इन चार प्रभागों में कार्यकर्ता मालामाल हो गए हैं, जबकि बस्तियों में पैसे बांटने के आरोपों को लेकर झड़पों की घटनाएं भी सामने आ रही हैं।
महापालिका चुनाव की लड़ाई अब बेहद रोचक हो गई है। बड़े नेताओं की सभाओं से माहौल गर्माने लगा है। पुणे शहर के उपनगरों में मुकाबला खासा कड़ा माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि हर प्रभाग में कम से कम 100 करोड़ रुपये का लेन-देन हो सकता है।
गौरतलब है कि 2017 और 2021 में पुणे महापालिका में 32 गांव शामिल किए गए थे। इन गांवों को पुराने शहरी प्रभागों के साथ जोड़कर नए प्रभाग बनाए गए हैं। ऐसे ही चार प्रभागों में अमीर उम्मीदवारों ने चुनावी गणित ही बदल दिया है। हर उम्मीदवार ने करीब 15 करोड़ रुपये तक खर्च करने की तैयारी कर रखी है। इस तरह दो प्रमुख पैनलों के बीच कुल 120 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है, जिसे देखकर प्रशासन भी हैरान है। इन प्रभागों में रोजाना आचार संहिता की धज्जियां उड़ने और ‘पैसों की बारिश’ की चर्चाएं आम हो गई हैं।
पश्चिम पुणे के सूस–बानेर–पाषाण प्रभाग में पैसे बांटने के आरोप में एक मामला दर्ज किया गया है। वहीं शुक्रवार को फिर से इसी मुद्दे पर हंगामा हुआ।
कार्यकर्ताओं की चांदी
हडपसर और वडगांव शेरी विधानसभा क्षेत्रों के प्रभागों में इस समय जमकर पैसा बह रहा है। कार्यकर्ताओं की खूब चांदी हो रही है और मतदाताओं को लुभाने के लिए तरह-तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं। हालांकि महापालिका प्रशासन इन गतिविधियों पर नजर रखे हुए है, लेकिन उम्मीदवार प्रशासन को चकमा देकर अपने तरीके जारी रखे हुए हैं। मतदान से 48 घंटे पहले इन इलाकों में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन से अतिरिक्त सतर्कता बरतने की मांग की जा रही है।
