अमृतसर 11 जनवरी 2026 : त्यौहारों का मौसम नजदीक आते ही बाजारों में रौनक बढ़ जाती है। रंग-बिरंगी पतंगों, डोरों व अन्य सामान से सजी दुकानें लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं, लेकिन इस बार त्यौहारों की यह रौनक महंगाई की छाया में दबी हुई नजर आ रही है। बाजारों में पतंगों के दाम पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुने हो चुके हैं, जिससे आम लोग काफी परेशान दिखाई दे रहे हैं।
पिछले साल जो पतंग 5 रुपए में मिल जाती थी, वह इस बार 10 रुपए में बिक रही है। इसी तरह 10 रुपए वाली पतंग अब 20 रुपए तक पहुंच गई है। बच्चों और युवाओं के लिए, जो हर साल बड़े उत्साह के साथ पतंग उड़ाते हैं, यह महंगाई त्यौहार की खुशियों को काफी हद तक कम करती नजर आ रही है।
आम लोगों का कहना है कि महंगाई के कारण अब त्यौहार मनाना भी मुश्किल होता जा रहा है। कई अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की खुशी के लिए पतंगें तो लेनी ही पड़ती हैं, लेकिन अगर दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो हर कोई यह शौक पूरा नहीं कर सकेगा, जिससे लोगों की खुशियों को एक ग्रहण लगता नजर आ रहा है।
क्या कहते हैं दुकानदार
दूसरी तरफ दुकानदारों का कहना है कि दाम बढ़ाने के पीछे कई कारण हैं। पतंग बनाने में इस्तेमाल होने वाले कागज, बांस और अन्य सामग्री की कीमतों में भारी बढ़ौत्तरी हुई है। इसके अलावा, श्रम लागत और परिवहन के दाम भी काफ़ी बढ़ चुके हैं। दुकानदारों के अनुसार वे अपनी मर्ज़ी से नहीं, बल्कि मजबूरी में दाम बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और प्रशासन द्वारा स्थानीय कारीगरों को सहायता दी जाए और कच्चे माल के दामों पर नियंत्रण किया जाए तो पतंगों की कीमतों में कमी आ सकती है। इससे न सिर्फ़ आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि स्थानीय व्यापार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पतंगें सिर्फ एक खेल नहीं, त्यौहारों की आत्मा
अंत में कहना गलत नहीं होगा कि पतंगें सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि त्यौहारों की आत्मा हैं, लेकिन अगर महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले समय में यह परंपरा केवल कुछ लोगों तक ही सीमित रह सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है, ताकि त्योहारों की खुशियां हर वर्ग तक पहुंच सकें।
