पुणे 05 जनवरी 2026 : पुणे महापालिका चुनाव में प्रभाग क्रमांक 18 (वानवडी-साळुंखे विहार) की लड़ाई अब बेहद रोमांचक और दिलचस्प हो गई है। लंबे समय तक साथ मिलकर काम करने वाले दो पुराने मित्र, प्रशांत जगताप और अभिजीत शिवरकर, अब चुनाव के मैदान में आमने-सामने खड़े हैं। दोनों के हालिया पार्टी बदलने के फैसलों ने शहर में खूब चर्चा बटोरी है।
जगताप का पार्टी बदलना
प्रशांत जगताप ने लंबे समय तक राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के शहराध्यक्ष के रूप में काम किया। लेकिन 2024 के विधानसभा चुनाव में मिली हार और बदलते राजनीतिक समीकरणों के चलते उन्होंने कांग्रेस में प्रवेश किया। उनके इस निर्णय ने राज्यभर में सुर्खियां बटोरीं; कुछ इसे वैचारिक बदलाव मानते हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक जोखिम के तौर पर देख रहे हैं।
शिवरकर का बीजेपी में जाना
दूसरी ओर, जगताप के कांग्रेस में शामिल होते ही माजी मंत्री बाळासाहेब शिवरकर के पुत्र अभिजीत शिवरकर ने तत्काल कांग्रेस छोड़कर बीजेपी जॉइन कर लिया। बीजेपी ने उन्हें जगताप के सामने मैदान में उतारा और एक बड़ा राजनीतिक मुकाबला तैयार किया। वानवडी प्रभाग पहले कांग्रेस-राष्ट्रवादी का मजबूत क्षेत्र माना जाता था। लेकिन शिवरकर का स्थानीय प्रभाव और बीजेपी की मजबूत संगठन क्षमता के कारण यहां की लड़ाई अब एकतरफा नहीं रह गई है।
इस प्रभाग में मुख्य मुकाबला बीजेपी बनाम महाविकास आघाड़ी और मनसे के बीच देखने को मिल रहा है। मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है और उनके रुख पर चुनाव का समीकरण निर्भर करेगा। जगताप के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा और यह देखना रोचक होगा कि मतदाताओं ने उनके हालिया निर्णय को कितना स्वीकार किया। वहीं, शिवरकर के लिए यह अपने पिता का राजनीतिक वारिस साबित करने और बीजेपी को प्रभाग में मजबूती देने का अवसर है।
कुल मिलाकर, बीजेपी के लिए यह ‘कठिन परीक्षा’ है—क्या प्रशांत जगताप बाजी मारेंगे या शिवरकर कमल खिलाएंगे, पूरे पुणे की नजरें इसी मुकाबले पर टिकी हैं।
