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फड़नवीस भूल गए ‘नो घरानेशाही’, BMC टिकट में परिवारवाद?

30 दिसंबर 2025 : मुंबई महापालिका चुनाव में भाजपा ने पहले यह आश्वासन दिया था कि उम्मीदवारों का चयन नेताओं के रिश्तेदारों के बजाय कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देते हुए किया जाएगा। लेकिन अब यह आश्वासन भाजपा भूल गई है।

भाजपा के साथ ही शिवसेना उबाठा और कांग्रेस ने भी नेताओं के नाते-रिश्तेदारों को टिकट देकर घरानेशाही को बढ़ावा दिया है। इसके तहत सांसदों, विधायकों और पूर्व नगरसेवकों के भाई, बहन, पत्नी और बच्चे भी उम्मीदवार बने हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने पहले स्थानीय चुनावों में नेताओं के रिश्तेदारों को उम्मीदवार न बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन BMC चुनाव में यह निर्णय भाजपा को याद नहीं रहा। सोमवार को भाजपा द्वारा जारी AB फॉर्म में कई उम्मीदवार वर्तमान और पूर्व सांसद/विधायक परिवार से हैं। यही स्थिति कांग्रेस और शिवसेना उबाठा में भी देखी गई। इससे कई वर्षों से कार्यरत रहे कार्यकर्ता चुनाव में वंचित रह गए।

मुख्य उदाहरण:

  • भाजपा: माजी सांसद किरीट सोमय्या के पुत्र और पूर्व नगरसेवक नील सोमय्या को मुलुंड के वार्ड 107 से उम्मीदवार बनाया गया। विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के भाई मकरंद नार्वेकर को वार्ड 226 और बहन हर्षिता नार्वेकर को वार्ड 227 से उम्मीदवार बनाया गया। माजी विधायक राज पुरोहित के पुत्र आकाश भी चुनावी मैदान में हैं।
  • शिवसेना (उबाठा): विधायक सुनील प्रभू के पुत्र अंकित को गोरेगांव वार्ड 54 से, माजी विधायक प्रकाश फातर्पेकर की बेटी सुप्रदा को चेंबूर वार्ड 150 से, विधायक मनोज जामसूतकर की पत्नी सोनम को वार्ड 210 से उम्मीदवार बनाया गया।
  • कांग्रेस: विधायक अस्लम शेख के पुत्र हैदर को मालाड पश्चिम वार्ड 34 से उम्मीदवार बनाया गया।
  • राष्ट्रवादी कांग्रेस: विधायक नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक और बहनें डॉ. सईदा खान व बुशरा परवीन मलिक को टिकट दिया गया।

इस तरह सभी प्रमुख पार्टियों में ‘घरानेशाही’ ने उम्मीदवार चयन में प्रमुख भूमिका निभाई है।

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