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महाकुंभ भगदड़ पर इलाहाबाद HC सख्त, पीड़ित परिवार को जल्द मुआवजा देने का निर्देश

28 अक्टूबर 2025 : प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 के दौरान मौनी अमावस्या स्नान पर्व पर हुई भगदड़ में अपनी पत्नी और बेटी को खो चुके व्यक्ति को अब न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार और कुंभ मेला अधिकारी को मृतक के पति के मुआवजा संबंधी आवेदन का एक माह के भीतर निस्तारण करने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट की दो-न्यायाधीशों की खंडपीठ का आदेश
न्यायमूर्ति अजित कुमार और स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण पीड़ित को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे पीड़ित के आवेदन पर आवश्यक कार्रवाई कर मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करें।

बलिया निवासी की पत्नी-बेटी की भगदड़ में मौत
मामला बलिया जिले के नसीराबाद गांव निवासी दिनेश पटेल से जुड़ा है। महाकुंभ 2025 के दौरान भगदड़ की घटना में उनकी पत्नी रीना देवी (35 वर्ष) और बेटी रोशन पटेल (12 वर्ष) की दर्दनाक मौत हो गई थी। सरकार ने उस समय प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹25 लाख का मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन दिनेश पटेल को अब तक कोई भुगतान नहीं मिला।

प्रशासनिक देरी पर अदालत की नाराज़गी
दिनेश पटेल ने लंबे समय तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए, परंतु कोई समाधान नहीं मिला। अंततः उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि पीड़ित को राहत देने में देरी अस्वीकार्य है। अब मेला अधिकारी को एक महीने के भीतर उनका आवेदन निस्तारित करना अनिवार्य होगा।

अदालत ने स्पष्ट किया – मुआवजे का अधिकार सुनिश्चित हो
कोर्ट ने यह भी कहा कि मुआवजा केवल घोषणा तक सीमित न रहे, बल्कि व्यावहारिक रूप से पीड़ित तक पहुंचे। यह न केवल प्रशासनिक दायित्व है, बल्कि मानवीय संवेदना का भी विषय है।

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