पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब कैडर के अधिकारी से चंडीगढ़ के एसएसपी का पदभार समय से पहले लेकर हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी को सौंपने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री मान ने इस संबंध में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारी लाल पुरोहित को पत्र लिखकर एतराज जताया है।

गौरतलब है कि 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी कुलदीप सिंह चहल को सोमवार रात को चंडीगढ़ के एसएसपी के पद से हटाकर उनके मूल कैडर पंजाब वापस भेज दिया गया जबकि केंद्र शासित प्रदेश में उनके तीन साल के कार्यकाल में अभी 10 महीने का समय बाकी था। वे अक्तूबर 2020 में चंडीगढ़ के एसएसपी नियुक्त हुए थे। तय नियमों के अनुसार, चंडीगढ़ में एसएसपी (कानून-व्यवस्था) का पद पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी के लिए आरक्षित है जबकि एसएसपी (यातायात) का पद हरियाणा कैडर के अधिकारी के पास है।

कुलदीप सिंह चहल को वापस पंजाब भेजने का आदेश यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने जारी किया जोकि पंजाब के राज्यपाल भी हैं। सोमवार को जारी आदेश में कहा गया कि ‘चंडीगढ़ के प्रशासक ने कुलदीप सिंह चहल को चंडीगढ़ प्रशासन (पुलिस) की सेवा से तत्काल प्रभाव से राहत देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की है ताकि वह पंजाब सरकार के साथ एक नया कार्यभार संभाल सकें।’ इस आदेश के साथ ही यूटी प्रशासक ने हरियाणा कैडर की अधिकारी मनीषा चौधरी को एसएसपी का प्रभार सौंपा है।
भगवंत मान ने मंगलवार को राज्यपाल को पत्र लिखकर चहल को समय से पहले वापस भेजने और हरियाणा कैडर की अधिकारी को प्रभार सौंपने पर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने पत्र में लिखा कि ‘जैसा कि आप जानते हैं, यूटी चंडीगढ़ के एसएसपी पद पर पारंपरिक रूप से पंजाब कैडर के आईपीएस अधिकारी और डीसी चंडीगढ़ के पद पर हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी का कब्जा रहा है। हालांकि, मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि कुलदीप सिंह चहल को समय से पहले पंजाब वापस भेज दिया गया है और इस पद का प्रभार हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी को दिया गया है। यह यूटी चंडीगढ़ के मामलों को चलाने में राज्यों के बीच संतुलन को बिगाड़ने वाला है।’

राज्यपाल को भेजे अपने पत्र में मान ने यह भी लिखा कि अगर किसी कारण से कुलदीप सिंह चहल को वापस भेजा जाना था तो उपयुक्त आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल पंजाब से पहले से मांगा जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि जल्दी ही हम एसएसपी चंडीगढ़ के पद के लिए पंजाब कैडर के तीन आईपीएस अधिकारियों का एक पैनल भेजेंगे। मुझे आशा है कि आप जल्द से जल्द पंजाब कैडर के एक आईपीएस अधिकारी को एसएसपी चंडीगढ़ के रूप में नियुक्त करेंगे।

पंजाब सरकार व राज्यपाल में तीसरा टकराव
पंजाब में आठ महीनों के दौरान यह तीसरा मौका है जब राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच किसी मुद्दे पर टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई है। इससे पहले विधानसभा सत्र बुलाकर विश्वास प्रस्ताव लाने पर उस समय विवाद हो गया था जब राज्यपाल ने सत्र बुलाने की अनुमति वापस ले ली थी। हालांकि बाद में सरकार ने सत्र के कार्यों की रूपरेखा पेश कर अनुमति हासिल कर ली थी।
दूसरा विवाद उस समय उठा जब सरकार ने राज्यपाल की अनुमति के बिना पीएयू और पीयू के उप-कुलपतियों की नियुक्ति कर दी। इस नियुक्ति को राज्यपाल के निरस्त करने का मामला अभी तक हल नहीं हुआ कि सोमवार को चंडीगढ़ के एसएसपी पद से कुलदीप सिंह चहल को रिलीव कर हरियाणा के अफसर की नियुक्ति ने पंजाब सरकार और राज्यपाल को फिर आमने-सामने ला दिया है।

आप ने केंद्र पर बोला सियासी हमला
आप पंजाब के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि केंद्र सरकार लगातार पंजाब के हकों पर डाका डाल रही है। पंजाब के हक को दबाने के लिए राजभवन का दुरुपयोग किया जा रहा है। चंडीगढ़ में बतौर एसएसपी हमेशा पंजाब कैडर के अधिकारी की ही तैनाती होती रही है। केंद्र सरकार का यह निर्णय पंजाब के अधिकारों से छेड़छाड़ है। पंजाब को कमजोर करने की साजिश रची जा रही है। आम आदमी पार्टी इसका विरोध करेगी। एसएसपी को गैर-संवैधानिक तरीके से हटाया गया है। आप नेता का कहना है कि ऐसी क्या जल्दबाजी थी कि एक काबिल अधिकारी को पद से हटाया गया।

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